दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई 5

बुआ बोली ठीक है और मैं खेत के मकान में आकार आराम करने लगा। कुछ देर बाद कमरे मैं सुमन आयी और कहने
लगी, दीन भैया आप वहां बैठ जाये क्यों कि कमरे मैं झाड़ू मारनी है। और मैं कमरे के एक कोने मैं बैठ गया। और वो
कमरे मैं झाड़ू मारने लगी।

झाड़ू मारते समय जब सुमन झुकी तो फिर मुझे उसकी चड्डी दिखायी देने लगी। और उसकी चुदायी के ख्यालओ मे
खो गया। थोड़ी देर बाद फिर वो बोली "भैया जरा पैर हटा लो झाड़ू देनी है।" मैं चौंक कर हकीकत की दुनियां मे वापस
आ गया। देखा सुमन कमर पर हाथ रखी मेरे पास खड़ी है। मैं खड़ा हो गया और वो फिर झुक कर झाड़ू लगाने लगी।
मुझे फिर उसकी चड्डी दिखायी देने लगी। आज से पहले मैंने उस पर ध्यान नही दिया था।। पर आज की बात ही कुछ
और थी। रात माँ से चुदायी कि ट्रैनिंग पकड़ एक ही रात मे मेरा नज़रिया बदल गया था। अब मैं हर औरत को चुदायी
की नज़रिये से देखना चाहता था। जब वो झाड़ू लगा रही थी तो मैं उसके सामने आकर खड़ा हो गया अब मुझे उसके
ब्लाऊज़ से उसकी चूंची साफ़ दिखायी दे रही थी। मेरा लण्ड फन-फना गया। रात वाली माँ जैसी चूंची मेरे दिमाग के
सामने घूमने लग

तभी सुमन कि नज़र मुझ पर पड़ी। मुझे एकटक घूरता देख पकड़ लिया। उसने एक दबी से मुसकान दी और अपना
ब्लाऊज़ ठीक कर अपनी चूंचियों को ब्लाऊज़ के अन्दर छुपा लिया। अब वो मेरी तरफ़ पीठ कर के झाड़ू लगा रही थी।
उसके चूतड़ तो और भी मस्त थे।

मैं मन ही मन सोचने लगा कि इसकी गाण्ड मे लण्ड घुसा कर चूंची को मसलते हुए चोदने मे कितना मज़ा आयेगा।
बेखयाली मे मेरा हाथ मेरे तन्नाये हुए लण्ड पर पहुच गया और मैं लुंगी के उपर से ही सुपाड़े को मसलने लगा। तभी
सुमन अपना काम पूरा कर के पल्टी और मेरे हरकत देख कर मुंह पर हाथ रख कर हंसती हुई बाहर चली गयी।

थोड़ी देर बाद बुआ जी और सुमन हाथ पैर धोकर आये और मुझे कहा कि चलो दीन बेटे खाना खालो। अब हम तीनो
खाना खाने बैठ गये। बुआ जी मेरे सामने बैठी थी और सुमन मेरे बायी साईड की ओर बैठी थी। सुमन पालथी मारके
बैठी थी और बुआ जी पैर पसारे बैठी थी।

खाना खाते समय मैंने कहा बुआ जी आज खाना तो जायेकेदार बना है। बुआ जी ने कहा मैंने तुम्हारे लिये खास बनाया
है। तुम यहां जितने दिन रहोगे गावँ का खाना खा खा कर और मोटे हो जाओगे। मैं हंस पढा और कहा अगर ज्यादा
मोटा हो जाऊंगा तो मुशकिल हो जायेगी। बुआ जी और सुमन हंस पड़ी। थोड़ी देर बाद बुआ जी ने कहा सुमन तुम
खाना खा कर खेत मैं खाद डाल आना। मैं थोड़ा आराम करुंगी।

हम सब ने खाना खाया। सुमन बरतन धो कर खेत मैं खाद डालने लगी। मैं और बुआ जी चटाई बिछा कर आराम
करने लगे। मुझे नींद नहीं आ रही थी। आज मैं बुआ जी या सुमन को चोदने का विचार बना रहा था। विचार करते
करते कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला।

जब मेरी नींद खुली तो शाम के करीब 5 बज रहे थे। मैंने देखा कि मेरा मोटा लण्ड तन कर कड़क हो कर खड़ा था
और लुंगी से बाहर निकल कर मुझे सलामी दे रहा था। इतने में बुआ जी कमरे मैं आयी। मैंने झट से आंखे बंद कर
लिया।

थोड़ी देर बाद थोड़ी आंख खोल कर देखा कि बुआ जी कि नज़र मेरे खड़े हुवे मोटे लण्ड पर टिकी थी। हैरत भरी
निगाहो से मेर लम्बे और मोटे लण्ड को देख रही थी। कुछ देर बाद उन्होने आवाज दे कर कहा "दीन बेटा उठ जाओ
अब घर चलना है"

मैंने कहा ठीक है और उठकर बैठ गया मेरा लण्ड अब भी लुंगी से बाहर था। बुआ जी मेरी और देखाते हुवे बोली "दीन
बेटा क्या तुमने कोई बुरा सपना देखा था क्या " मैंने मुशकिल से कहा नहीं तो बुआ जी, क्यों क्या हुवा। वो बोली नीचे
तो देखो क्या दिख रहा है। जब मैंने नीचे देखा तो मेरा लण्ड लुंगी से निकला हुआ था। मैं शरम से लाल हो कर अपना
लण्ड चड्डी मैं छूपा लिया। ऐसा करते समय बुआ जी हंस रही थी।

हम करीब 6:30 बजे घर पहुचे। रास्ते भर कोई भी बात चित नहीं हुयी। घर आकर मैंने कहा कि मैं बाज़ार होके आता
हूं और फिर बाज़ार जाकर 1 विस्की की बोतल ले आया। जब घर पहुचा तो रात के 9 बज रहे थे। मुझे आया देख कर
बुआ जी ने आवाज दी बेटा आकार खाना खालो। मैं बोला बुआ जी अभी भूख नहीं है थोड़ी देर बाद खा लूंगा। फिर मैंने
पूछा माँ और सुमन कहां है (क्योंकि माँ और सुमन ना तो रसोइ घर में थे नहीं आगन में थे) बुआ जी ने कहा कि
हमारे रिस्तेदार के यहां आज रात भर भजन और कीरतन है इसलिये भाभी और सुमर रिस्तेदार के यहां गये है और
सुबह 5-6 बजे लोटेगे। मैंने कहा "ठीक है बुआ जी, अगर आप बुरा ना मनो तो क्या मैं थोड़ी विस्की पी सकता हूं "

भाभी बोली "ठीक है तुम आंगन में बैठो मैं वही खाना लेकर आती हूं। मैं आंगन में बैठ कर विस्की पीने लगा। करीब
आधे घण्टे बाद बुआ जी खाना लेकर आयी तब तक मैं 3-4 पेग पी चुका था और मुझे थोड़ा विस्की का नशा होने लगा
था। बुआ जी और मैं खाना खाने के बाद, बुआ जी के कमरे में आ गये। मैंने पेण्ट और शर्ट निकल कर लुंगी और
बनियान पहन ली। बुआ जी भी साड़ी खोल कर केवल नाईटी पहनी हुयी थी।

जब बुआ जी खड़ी होकर पानी लाने गयी तो मुझे उनके पारदर्शी नाईटी से उनका नक्शा दिखायी दिया। उन्होने नाईटी
के अन्दर ना तो ब्लाऊज़ पहना था ना हीं पेटीकोट पहना था इसलिये लाईट की रोशनी के कारण उनका जिस्म नाईटी
से झलक रहा था। जब वो पानी लेकर वापस आयी। हम बैठ कर बाते करने लगे।

बुआ जी: दीन, क्या तुम शहर में कसरत करते हो "

दीन: हा बुआ जी रोज सुबह उठकर कसरत करता हूं।

बुआ जी: इसलिये तुम्हारा एक एक अंग काफ़ी तगड़ा और तंदरुस्त है। क्या तुम अपने बदन पर तेल लगा कर मालिश
करते हो खास तोर पर शरीर के निचले हिस्से पर "

दीन: मैं हर रोज़ अपने बदन पर सरसो का तेल लगा कर खूब मालिश करता हूं।

बुआ जी: हा आज मैंने तुम्हारा शरीर के अलावा अन्दर का अंग भी दोपहर को देखा था वाकई काफ़ी मोटा लम्बा और
तन्दरुस्त है। हर मरदोन का इस तरह का नहीं होता है।

बुआ जी कि बात सुन कर मैं शर्म के मारे लाल हो गया। पूरे मकान मैं हम दोनो अकेले थे। और इस तरह की बाते
करते थे।

मैंने भी बुआ जी से कहा। बुआ जी आप भी बहुत सुन्दर हो और आपका बदन भी सुडौल है।

बुआ जी: दीन मुझे ताड़ के झाड़ पर मत चढाओ। तुमने तोह अभी मेरा बदन पूरा तरह देखा ही कहां है। मैंने बोला
आप ने तो मुझे दिखाया ही नहीं और मेरे शरीर के निचले हिस्से का दरशन भी कर लिया। इतना सुनते ही वो झट
बोली। मुझे कहां अच्छी तरह से तुम्हारा नीचे का दरशन हुवा। चलो एक शरत पर तुम्हे मेरे अन्दरूनी भाग दिखा दूंगी
अगर तुम मुझे अपना नीचे का मस्त दिखाओगे तो "

मैंने झट से लुंगी से लण्ड निकल कर उन्हे दिखा दिया। बुआ जी भी अपने वादे के अनुसार नाईटी उपर कर के अपनी
चूत दिखा दी और मुसकराती बोली राजा बेटा खुश हो अब। हाय बड़ी जालीम चूत थी। चूत देखते ही मेरा लण्ड तन
कर फड़फड़ाने लगा। कुछ देर तक मेरे लण्ड कि और देखने के बाद बुआ जी मेरे पास आयी और झट से मेरी लुंगी
खोल दी। फिर खड़े होकर अपनी नाईटी भी उतार दी और नंगी हो गयी। फिर मुझे कुर्सी से उठ कर पलंग पर बैठने को
कहा।

जब मैं पलंग पर बैठ कर बुआ जी कि मस्त रसिली चूंची को देख रहा था तो मरे मस्ती के मेरा लण्ड चूत की और
मुंह उठाये उनकी चूत को सलामी दे रहा था। बुआ जी मेरी जांघो के बीच बैठ कर दोनो हाथो से मेरे लौड़े को सहलाने
लगी। कुछ देर सहलाने के बाद अचानक बुआ ने अपना सर नीचे झुका लिया और अपने रसीले होठो से मेरे सुपाड़े को
चूम कर उसको मुंह मे भर लिया। मैं एकदम चौंक गया। मैंने सपने मे भी नही सोचा था कि ऐसा होगा।

"बुआ जी एह क्या कर रही हो। मेरा लण्ड तुमने मुंह मे क्यों ले लिया है।"

"चूसने के लिये और किस लिये" तुम आराम से बैठे रहो और बस लण्ड चूसायी का मज़ा लो। एक बार चूसवा लोगे
फिर बार-बार चूसने को कहोगे।" बुआ जी मेरे लण्ड को लोल्लीपोप कि तरह मुंह ले लेकर चूसने लगी। मैं बता नही
सकता हूं कि लण्ड चूसवाने मे मुझे कितना मज़ा आ रहा था। बुआ जी के रसीले होंठ मेरे लण्ड को रगड़ रहे थे। फिर
बुआ जी ने अपना होंठ गोल कर के मेरा पूरा लण्ड अपने मुंह मे ले लिया और मेरे आण्ड को हाथेली से सहलाते हुए
सिर उपर नीचे करना शुरु कर दिया मानो वो मुंह से ही मेरा लण्ड को चोद रही हो।

धीरे-धीरे मैंने भी अपनी कमर हिला कर बुआ जी के मुंह को चोदना शुरु कर दिया। मैं तो मानो सातवे आसमान पर
था। बेताबी तो सुबह से ही हो रही थी। थोड़ी ही देर मे लगा कि मेरा लण्ड अब पानी छोड़ देगा। मैं किसी तरह अपने
उपर काबू कर के बोला, "भुवाजीईईई मेरा पानी छूटने वाला है।"

बुआ जी ने मेरे बातों का कुछ ध्यान नही दिया बल्कि अपने हाथों से मेरे चूतड़ को जकड़ कर और तेज़ी से सिर
उपर-नीचे करना शुरु कर दिया। मैं भी उनके सिर को कस कर पकड़ कर और तेज़ी से लण्ड उनके मुंह मे पेलने लगा।
कुछ ही देर बाद मेरे लण्ड ने पानी छोड़र दिया और बुआ जी ने गटगट करके पूरे पानी को पी गयी।

सुबह से काबू मे रखा हुआ मेरा पानी इतना तेज़ी से निकला कि उनके मुंह से बाहर निकल कर उनके ठोड़ी पर फैल
गया। कुछ बूंदे तो टपक कर उनकी चूंची पर भी जा गिरी। झड़ने के बाद मेंने अपना लण्ड निकाल कर बुआ जी के
गालों पर रगड़ दिया। क्या खुबसुरत नजारा था। मेरा वीर्य बुआ जी के मुंह गाल होंठ और रसीले चूंची पर चमक रहा
था।

बुआ जी ने अपनी गुलाबी जीभ अपने होंठो पर फिरा कर वहां लगा वीर्य चाटा और फिर अपनी हथेली से अपनी चूंची
को मसलते हुए पूछा, "क्यों दीन बेटा मज़ा आया लण्ड चुसवाने मे"

मैं बोला "बहुत मज़ा आया बुआ जी, तुमने तो एक दूसरी जन्नत कि सैर करवा दिया मेरी जान। आज तो मैं तुम्हारा
सात जन्मों के लिये गुलाम हो गया। कहो क्या हुक्म है।" बुआ जी बोली"हुक्म क्या, बस अब तुम्हारी बारी है।"मैं कहा
"क्या मतलब, मैं कुछ समझा नही"

बुआ जी बोली "मतलब यह कि अब तुम मेरी चूत चाटो।" यह कह कर बुआ जी खड़ी हो गयी और अपनी चूत मेरे चेहरे
के पास ले आई। मेरे होंठ उनकी चूत के होंठो को छूने लगी। बुआ जी ने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी कमर आगे कि
और अपनी चूत मेरे नाक पर रगड़ने लगी। मैंने भी उनकी चूतड़ को दोनो हाथों से पकड़ लिया और उनकी गाण्ड
सहलते हुए उनकी रसीली चूत को चूमने लगा।

बुआ जी कि चूत कि प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग मे छाने लगी। मैं दीवानों कि तरह उनकी चूत और उसके चारों
तरफ़ के इलाके को चूमने लगा। बीच-बीच मे मैं अपनी जीभ निकल कर उनकी रानो को भी चाट ले्ता। बुआ जी मस्ती
से भर कर सिसकारी लेते हुए अपनी चूत को फ़ैलाते हुये बोली, "हाय राजा अह्हह्हह! जीभ से चाटो ना। अब और मत
तड़पाओ राजा। मेरी बुर को चाटो। डाल दो अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर। अन्दर डाल कर जीभ से चोदो।"

अब तक उनकी नशीली चूत कि खुशबू ने मुझे बुरी तरह से पागल बना दिया था। मैंने उनकी चूत पर से मुंह उठाये
बिना उन्हे खींच कर पलंग पर बैठा दिया और उनकी जांघो को फैला कर अपने दोनो कंधो पर रख लिया और फिर
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