दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई 2

खेत पहुच कर बुआ जी काम में लग गयी और कहा कि तुम्हे अगर गरमी लग रही हो तो शर्ट निकाल लो उस मकान
में लुंगी भी है चाहे तो लुंगी पहन लो और यहां आकर मेरी थोड़ी मदद कर दो। मैं मकान में जाकर शर्ट उतार दिया
और लुंगी बनियान पहनकर बुआ जी के काम में मदद करने लगा। काम करते करते कभी कभी मेरा हाथ बुआ जी के
चूतड़ पर भी टच होता था। कुछ देर बाद बुआ जी से मैंने पूछा, बुआ जी यहां कहीं पेशाब करने की जगह है "

बुआ जी बोली कि मकान के पीछे झाड़ियों में जाकर कर लो। मैं जब पेशाब कर के वापस आया तो देखा बुआ जी अब
भी काम कर रही थी। थोड़ी देर बाद बुआ जी बोली "आओ अब खाना खाते है और थोड़ी देर आराम कर के फ़िर काम
में लग जाते है" अब हम खेत के कोने वाले मकान में आकर खाना खाने की तैयारी करने लगे। मैं और बुआ दोनो ने
पहले हाथ पैर धोये फिर खाना खाने बैठ गये। बुआ जी मेरे सामने ही बैठ कर खाना खा रही थी।

खाना खाते समय मैंने देखा कि मेरे लुंगी जरा साईड में हट गयी थी जिस कारण मेरी चड्डी से आधा निकला हुआ
लण्ड दिखायी दे रहा था। और बुआ जी कि नज़र बार बार मेरे लण्ड पर जा रही थी। लेकिन उन्होने कुछ नहीं कहा
और बीच बीच मे उसकी नज़र मेरे लण्ड पर ही जा रही थी। खाना खाने के बाद बुआ जी बरतन धोने लगी जब वो झुक
कर बरतन धो रही थी तो मुझे उनके बड़े बड़े बूबस साफ़ नज़र आ रहे थे। उन्होने केवल ब्लाऊज़ पहना हुवा था।
बरतन धोने के बाद वो कामरे में आकर चटाई बिछा दी और बोली "चलो थोड़ी देर आराम करते है" मैं चटाई पर आकर
लेट गया। बुआ बोली "बेटे आज तो बड़ी गर्मी है" कह कर उन्होने अपनी साड़ी खोल दी और केवल पेटीकोट और
ब्लाऊज़ पहन कर मेरे बगल में आकर उस तरफ़ करवट कर के लेट गयी।

अचानक मेरी नज़र उनके पेटीकोट पर गयी। उनकी दाहिनी ओर की कामर पर जहां पेटीकोट का नाड़ा बंधा था वहा पर
काफ़ी गेप था और गेप से मैंने उनकी कुछ कुछ झांटे दिखायी दे रही थी। अब मेरा लण्ड लुंगी के अन्दर हरकत करने
लगा। थोड़ी देर बाद बुआ जी ने करवट बदली तो मैंने तुरंत आंखे बंद करके सोने का नाटक करने लगा।

थोड़ी देर बाद बुआ जी उठी और मकान के पीछे चल पड़ी। मैं उत्साह के कारण मकान की खिड़की पर गया। खिड़की
बंद थी लेकिन उसमे एक सुराख था। मैं सुराख पर आंख लगाकर देखा तो मकान का पिछला भाग साफ़ दिखायी दे रहा
था। बुआ वहां बैठ कर पेशाब करने लगी। सब करने के बाद बुआ जी थोड़ी देर अपनी चूत सहलाती रही फिर उठकर
मका्न के अन्दर आने लगी। फ़िर मैं तुरंत ही अपनी स्थान पर आकर लेट गया।

बुआ जी जब वापस मकान में आयी तो मैं भी उठकर पिछली तरफ़ पेशाब करने चला गया। मैं जान बूझ कर खिड़की
की तरफ़ लण्ड पकड़ कर पेशाब करने लगा। मैंने महसूस किया कि खिड़की थोड़ी खुली हुयी थी और बुआ जी की नज़र
मेरे लण्ड पर थी। पेशाब करके जब वापस आया तो देखा बुआ जी चित लेटी हुयी थी। मेरे आने के बाद बुआ बोली बेटे
आज मेरी कामर बहुत दुख रही है। क्या तुम मेरी कमर की मालिश कर सकते हो "

मैंने कहा क्यों नहीं।

उसने कहा ठीक है सामने तेल की शीशी पड़ी है उसे लगा कर मेरी कामर की मालिश कर देना। और फिर वो पेट के
बल लेट गयी। मैं तेल लगा कर उनकी कामर की मालिश करने लगा। वो बोली बेटे थोड़ा नीचे मालिश करो। मैंने कहा
बुआ जी थोड़ा पेटीकोट का नाड़ा ढीला करोगी तो मालिश करने में आसानी होगी और पेटीकोट पर तेल भी नहीं लगेगा।
बुआ जी ने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया। अब मैं उनकी कामर पर मालिश करने लगा। उन्होने और थोड़ा नीचे
मालिश करने को कहा। मैं थोड़ा नीचे कि तरफ़ मालिश करने लगा।

थोड़ी देर मालिश करने के बाद वो बोली बस बेटे और नाड़ा बंद कर लेट गयी। मैं भी बगल में आकर लेट गया। अब
मेरे दिलों और दिमाग ने कैसे चोदा जये यह विचार करने लगा। आधे घण्टे के बाद बुआ जी उठी और साड़ी पहन कर
अपने काम में लग गयी।

शाम को करीब 6 बजे हम घर पहुचे। घर पहुचकर मैंने कहा माँ मैं बाजार जा रहा हूं। 1 घण्टे बाद आजाऊंगा यह
कहकर मैं बाजार कि और निकल पड़ा। रास्ते में मैंने बीयर की दुकान से बीयर की बोतले ले आया। घर आकर हाथ
पैर धो कर केवल लुंगी पहन कर दूसरे कमरे में जाकर बीयर पीने लगा। एक घण्टे में मैंने 4 बोतले बीयर पी ली थी
और बीयर का नशा हावी होने लगा था।

इतने मे बुआ जी ने खाने के लिये आवाज लगयी। हम सब साथ बैठ कर खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद मैं
सिगरेट की दुकान जाकर सिगरेट पीने लगा जब वापस आया तो आंगन मे सब बैठ कर बाते कर रहे थे। मैं भी उनकी
बातों मे शामिल होगया और हंसी मजाक करने लगा।

बातों बातों में बुआ जी माँ से बोली "भाभी दीन बेटा अच्छी मालिश करता है आज खेत में काम करते करते अचनक
मेरी कमर मे दर्द उठा तो इसने अच्छी मालिश की और कुछ ही देर में मुझे आराम आगया" मां हंस पड़ी और मेरी
तरफ़ अजीभ नज़रो से देखने लगी। मैं कुछ नहीं कहा और सिर झुका लिया। करीब आधे घण्टे के बाद बहन और बुआ
सोने चली गयी। मैं और मां इधर उधर की बाते करते रहे। करीब रात 11 बजे मां बोली बता आज तो मेरे पैर दुख रहे
है। क्या तुम मालिश कर दोगे।

दीन :हा क्यूं नहीं। लेकिन आप केवल सूखी मालिश करवओगी या तेल लगाकर

मा: बेटा अगर तेल लगा कर करोगे तो आसानी होगी और आराम भी मिलेगा

दीन : ठीक है, लेकिन सरसो का तेल हो तो और भी अच्छा रहेगा और जल्दी आराम मिलेगा।

फिर माँ उठ कर अपने कमरे में गयी और मुझे भी अपने कमरे में बुला लिया। मैंने कहा आप चलिये मैं पेशाब करके
आता हूं। मैं जब पेशाब करके उनके कमरे में गया तो देखा माँ अपनी साड़ी खोल रही थी। मुझे देख कर बोली बेटा तेल
के दाग साड़ी पर ना लगे इसलिये साड़ी उतार रही हूं। वो अब केवल ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थी और मैं बनियान और
लुंगी में था। माँ ने तेल कि डिबिया मुझे देकर बिस्तर पर लेट गयी। मैं भी उनके पैर के पास बैठ कर उनके पैर से
थोड़ा पेटीकोट उपर किया और तेल लगा कर मालिश करने लगा।

माँ बोली बेटा बड़ा आराम आ रहा है। जरा पिंडली मैं जोर लगा कर मालिश करो। मैंने ने फिर उनका दायां पैर अपने
कनधे में रख कर पिंडली में मालिश करने लगा। उनका एक पैर मेरे कनधे पर था और दूसरा नीचे था जिस कारण
मुझे उनकी झांटे और चूत के दरशन हो रहे थे क्योंकि माँ ने अन्दर पेण्टी नहीं पहनी थी। वैसे भी देहाती लोग ब्रा और
पेण्टी नहीं पहनते है। उनकी चूत के दरशन पाते ही मेरा लण्ड हरकत करने लगा। माँ ने अपने पेटीकोट घुटनो के थोड़ा
उपर कर के कहा जरा और उपर मालिश करो। मैं अब पिंडली के उपर मालिश करने लगा और उनका पेटीकोट घुटनो
के थोड़ा उपर होने के कारण अब मुझे उनकी चूत साफ़ दिखायी दे रही थी इस कारण मेरा लण्ड फूल कर लोहे की
तरह कड़ा और सख्त हो गया। और चड्डी फ़ाड़ कर निकलने को बेताब हो रहा था। मैं थोड़ा थोड़ा उपर मालिश करने
लगा और मालिश करते करते मेरी उनगलीयां कभी कभी उनकी जांघो के पास चली जाती थी। जब भी मेरी उनगलीयां
उनके जांघो को स्पर्श करती तो उनके मुख से हाआ हाअ की आवाज निकलती थी। मैंने उनकी और देखा तो माँ की
आंखे बंद थी। और बार बार वो अपने होंठो पर अपनी जीभ फेर रही थी। मेंने सोचा कि मेरी उनगलीओ के स्पर्श से माँ
को मजा आ रहा है । क्यों ना इस सुनेहरे मौके का फ़ायदा उठाया जाये।

मैंने माँ से कहा माँ मेरे हाथ तेल की चिकनहटा के कारण काफ़ी फिसल रहे है। यदि आप को अच्छा नहीं लगता है तो
मालिश बंद कर दूं "

माँ ने कहा कोई बात नहीं मुझे काफ़ी आराम और सुख मिल रहा है। फिर मैं अपने हथेली पर और तेल लगा कर
उनके घुटनो के उपर मालिश करने लगा। मालिश करते करते अचनक मेरी उनगलियां उनके चूत के इलाके के पास छूने
होने लगी। वो आंखे बंद करके केवल आहे भर रही थी्। मेरी उनगलीयां उनके पेटीकोट के अन्दर चूत तो छूने कि
कोशिश कर रही थी। अचनक मेरी उंगली उनके चूत तो छू लिया, फिर मैं थोड़ा घबरा कर अपनी उनगली उनके चूत से
हटा ली और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिये उनके चेहरे की और देखा लेकिन माँ की आंखे बंद थी। वो कुछ नहीं बोल
रही थी। मेरा लण्ड सख्त होकर चड्डी के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था। मैंने माँ से कहा माँ मुझे पेशाब लगी है,
मैं पेशाब करके आता हूं फ़िर मालिश करुगा। माँ बोली ठीक है बेटा, वाकई तु बहुत अच्छा मालिश करता है। मन
करता है मैं रात भर तुझ से मालिश करवाऊ। मैं बोला कोई बात नहीं आप जब तक कहोगी मैं मालिश करुगायह कहा
कर मैं पेशाब करने चला गया। जब पेशाब करके वापस आरहा था तो बुआ जी के कमरे से मुझे कुछ कुछ आवाज
सुनायी दी, उत्सुकता से मैंने खिड़की कि और देखा तो वोह थोड़ी खुली थी ।

मैंने खिड़की से देखा बुआ जी एक दम नंगी सोयी थी और अपने चूत मैं ककड़ी डाल कर ककड़ी को अन्दर बाहर कर
रही थी और मुख से हा हाआ हाअ कि आवाज निकाल रही थी। यह सीन देख कर मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया। मैंने
सोचा बुआ जी कि मालिश कल करुगा आज सुखबिंदर कि माँ की मालिश करता हूं क्योंकि तवा गरम है तो रोटी सेख
लेनी चाहिये। मैं फिर माँ के कमरे में चला गया।

मुझे आया देख कर माँ ने कहा बेटा लाईट बुझा कर धीमी लाईट जला दो तकि मालिश करवाते करवाते अगर मुझे नींद
आ गयी तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना। मैंने तब लाईट बंद करके धीमी लाईट चालू कर दी जब वापास आया तो
माँ पेट के बल लेटी थी और उनका पेटीकोट केवल उनकी भारी भारी गाण्ड के भी उपर था बाकी पैरो का हिस्सा नंगा
था बिलकुल नंगा था।

अब मैं हथेली पर ढेर सारा तेल लगा कर उनके पैरो कि मालिश करने लगा। पहले पिंडली पर मालिश करता रहा फिर
मैं धीरे धीरे घुटनो के उपर जांघो के पास चूतड़ों के नीचे मालिश करता रहा। पेटीकोट चूतड़ पर होने से मुझे उनकी
झांटे और गाण्ड का छेद नज़र आ रहा था।

अब मैं हिम्मत कर के धीरे धीरे उनका पेटीकोट कमर तक उपर कर दिया। माँ कुछ नहीं बोली और उनकी आंखे बंद
थी। मैंने सोचा शायद उनको नींद आ गयी होगी। अब उनकी गाण्ड और चूत के बाल मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे।

मैंने हिम्मत करके तेल से भरी हुयी उनगली उनकी गाण्ड के छेद के उपर लगाने लगा वो कुछ नहीं बोली। मेरी हिम्मत
और बढ गयी। मेरा अंगूठा उनकी चूत की फ़ांको को छू रहा था और अंगूठे की बगल की उनगली उनकी गाण्ड के छेद
को सहला रही थी। यह सब हरकत करते करते मेरा लण्ड टाईट हो गया और चूत में घुसने के लिया बेताब हो गया।

इतने में माँ ने कहा कि बेटा मेरी कमर पर भी मालिश कर दो तो मैं उठकर पहले चुपके से मेरी चड्डी उतार कर
उनकी कमर पर मालिश करने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा कि माँ तेल से आप का ब्लाऊज़ खराब हो जायेगा। क्या आप अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा
उपर उठा सकती हो "

यह सुनकर माँ ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुये ब्लाऊज़ को उपर उठा दिया।

मैं फिर मालिश करने लगा्। मालिश करते करते कभी कभी मेरी हाथेली साईड से उनके बूबस तो छू जाती थी। उनकी
कोई भी प्रतिक्रिया ना देख कर मैंने उनसे कहा माँ अब आप सीधी सो जाईये। मैं अब आपकी स्पेशल तरिके से मालिश
करना चाहता हूं। माँ करवट बादल कर सीधी हो गयी मैंने देख अब भी उनकी आंखे बंद थी और उनके ब्लाऊज़ के सारे
बटन खुले थे और उनकी चूंची साफ़ झलक रही थी। उनकी चूंची काफ़ी बड़ी बड़ी थी और सांसो से साथ उठती बैठती
उनकी मस्त रसीली चूंची साफ़ साफ़ दिख रही था।

मा ने अपनी सुरीली और नशीली धीमी आवाज मेरे कनो मे पड़ी, "बेटा अब तुम थक गये होंगे यहां आओ ना।" और
मेरे पास ही लेट जाओ ना। पहले तो मैं हिचकिचाया क्यों कि मैं केवल लुंगी पहनी थी और लुंगी के अन्दर मेरा लण्ड

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