तीन भाभियाँ 2


थोड़ी देर तक मुह से मुँह लगाए वो खड़ी रही. अब उस ने अपना मुँह खोला और ज़बान से मेरे होत चाटे. ऐसा ही
करने के वास्ते मेने मेरा मुँह खोला तो उस ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. मुज़े बहुत अचच्ा लगा. मेरी जीभ से
उस की जीभ खेली और वापस चली गयी अब मेने मेरी जीभ उस के मुँह में डाली. उस ने होत सिकूड कर मेरी जीभ
को पकड़ा और चूस. मेरा लंड फटा जा रहा था. उस ने एक हाथ से लंड टटोला. मेरे तटर लंड को उस ने हाथ में लिया
तो उत्तेजना से उस का बदन नर्म पद गया. उस से खड़ा नहीं रहा गया. मेने उसे सहारा दे के पलंग पैर लेताया. चुंबन
छ्छोड़ कर वो बोली, 'हाय, मंगल, आज में पंद्रह दिन से भूकि हूँ पिच्छाले एक साल से मेरे पति मुज़े हैर रोज़ एक बार
छोड़ते है लेकिन यहाँ आने के मुज़े जलदी से छोड़ो, में मारी जा रही हूँ
मुसीबत ये थी की में नहीं जनता था की छोड़ने में लंड कैसे और कहाँ जाता है फिर भी मेने हिम्मत कर के उस की
ओधनी उतर फेंकी और मेरा पाजामा निकल कर उस की बगल में लेट गया. वो इतनी उतावाली हो गई थी की चोली
घाघारी निकल ने रही नहीं. फटाफट घाघारी उपर उठाई और जांघें चौड़ी कर मुज़े उपर खींच लिया. यूँ ही मेरे हिप्स
हिल पड़े थे और मेरा आठ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अंधे की लकड़ी की तरह इधर उधर सर टकरा रहा था,
कहीं जा नहीं पा रहा था. उस ने हमारे बदन के बीच हाथ डाला और लंड को पकड़ कर अपनी भोस पैर दीरेक्ट किया.मेरे हिप्स हिल ते थे और लंड छूट का मुँह खोजता था. मेरे आठ दस धक्के ख़ाली गाये हैर वक़्त लंड का मट्ताफिसल जाता था. उसे छूट का मुँह मिला नहीं. मुज़े लगा की में छोड़े बिना ही ज़द जाने वाला हूँ लंड का मट्ता और
बसंती की भोस दोनो काम रस से तार बतर हो गाये थे. मेरी नाकामयाबी पैर बसंती हास पड़ी. उस ने फिर से लंड
पकड़ा और छूट के मुँह पैर रख के अपने छूटड़ ऐसे उठाए की आधा लंड वैसे ही छूट में घुस गया. तुरंत ही मेने एक
धक्का जो मारा तो सारा का सारा लंड उस की योनी में समा गया. लंड की टोपी खीस गयी और चिकना मट्ता छूट की
दीवालों ने कस के पकड़ लिया. मुज़े इतना मज़ा आ रहा था की में रुक नहीं सका. आप से आप मेरे हिप्स तल्ला देने
लगे और मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए बसंती की छूट को छोड़ने लगा. बसंती भी छूटड़ हिला हिला कर लंड लेने लगी
और बोली, 'ज़रा धीरे छोड़, वरना जल्दी ज़द जाएगा.'
मेने कहा, 'में नहीं छोड़ता, मेरा लंड छोड़ता है और इस वक़्त मेरी सुनता नहीं है
'मार दालोगे आज मुज़े,' कहते हुए उस ने छूटड़ घुमए और छूट से लंड दबोचा. दोनो स्तानो को पकड़ कर मुँह से मुँह
छिपका कर में बसंती को छोड़ते चला.
धक्के की रफ़्तार में रोक नहीं पाया. कुच्छ बीस पचीस तल्ले बाद अचानक मेरे बदन में आनंद का दरिया उमड़ पड़ा.
मेरी आँखें ज़ोर से मूँद गयी मुँह से लार निकल पड़ी, हाथ पाँव आकड़ गाये और सारे बदन पैर रोएँ ए खड़े हो गाये
लंड छूट की गहराई में ऐसा घुसा की बाहर निकल ने का नाम लेता ना था. लंड में से गरमा गरम वीरय की ना जाने
कितनी पिचकारियाँ छ्छुथी, हैर पिचकारी के साथ बदन में ज़ुरज़ुरी फैल गयी थोड़ी देर में होश खो बेइता.
जब होश आया तब मेने देखा की बसंती की टाँगें मेरी कमर आस पास और बाहें गार्दन के आसपास जमी हुई थी. मेरा
लंड अभी भी ताना हुआ था और उस की छूट फट फट फटके मार रही थी. आगे क्या करना है वो में जनता नहीं था
लेकिन लंड में अभी गुड़गूदी होती रही थी. बसंती ने मुज़े रिहा किया तो में लंड निकल कर उतरा.
'बाप रे,' वो बोली, ' इतनी अचची छुड़ाई आज कई दीनो के बाद की.'
'मेने तुज़े ठीक से छोड़ा ?'
'बहुत अचची तरह से.'
हम अभी पलंग पैर लेते थे. मेने उस के स्तन पैर हाथ रक्खा और दबाया. पतले रेशमी कपड़े की चोली आर पार उस
की कड़ी निपपले मेने मसाली. उस ने मेरा लंड टटोला और खड़ा पा कर बोली, 'अरे वाह, ये तो अभी भी तटर है
कितना लंबा और मोटा है मंगल, जा तो, उसे धो के आ.'
में बाथरूम में गया, पिसब किया और लंड धोया. वापस आ के मेने कहा, 'बसंती, मुज़े तेरे स्तन और छूट दिखा. मेने
अब तक किसी की देखी नहीं है
उस ने चोली घाघारी निकल दी. मेने पहले बताया था की बसंती कोई इतनी ख़ूबसूरत नहीं थी. पाँच फ़ीट दो इंच की
उँचाई के साथ पचास किलो वज़न होगा. रंग सांवला, चहेरा गोल, आँखें और बल काले. नितंब भारी और चिकाने. सब से
अचच्े थे उस के स्तन. बड़े बड़े गोल गोल स्तन सीने पैर उपरी भाग पैर लगे हुए थे. मेरी हथेलिओं में समते नहीं थे.
दो इंच की अरेओला और छ्छोटी सी निपपले काले रंग के थे. चोली निकल ते ही मेने दोनो स्तन को पकड़ लिया,
सहलाया, दबोचा और मसला.
उस रात बसंती ने मुज़े पुख़्त वाय की भोस दिखाई. मोन्स से ले कर, बड़े होत, छ्होटे होत, क्लटोरिस, योनी सब
दिखाया. मेरी दो उंगलियाँ छूट में डलवा के छूट की गहराई भी दिखाई, ग-स्पोत दिखाया. वो बोली, 'ये जो क्लटोरिस है

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तीन भाभियाँ

जब में अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया, काशी राम चौथी शादी
करना सोच रहे थे.
हम सब राजकोट से पच्चास किलोमेटेर दूर एक छ्होटे से गाओं में ज़मीदार हैं एक साओ बिघन की खेती है और लंबा
चौड़ा व्यवहार है हमारा. गाओं मे चार घर और कई दुकानें है मेरे माता-पिताजी जब में दस साल का था तब मार गए
थे. मेरे बड़े भैया काश राम और भाभी सविता ने मुज़े पल पोस कर बड़ा किया.
भैया मेरे से तेरह साल बड़े हें. उन की पहली शादी के वक़्त में आठ साल का था. शादी के पाँच साल बाद भी सविता
को संतान नहीं हुई. कितने डॉकटोर को दिखाया लेकिन सब बेकार गया. भैया ने डूसरी शादी की, चंपा भाभी के साथ
तब मेरी आयु तेरह साल की थी.
लेकिन चंपा भाभी को भी संतान नहीं हुई. सविता और चंपा की हालत बिगड़ गई, भैया उन के साथ नौकरानीयों जैसा
व्यवहार कर ने लगे. मुज़े लगता है की भैया ने दो नो भाभियों को छोड़ना चालू ही रक्खा था, संतान की आस में.
डूसरी शादी के तीन साल बाद भैया ने तीसरी शादी की, सुमन भाभी के साथ. उस वक़्त में सोलह साल का हो गया था
और मेरे बदन में फ़र्क पड़ना शुरू हो गया था. सब से पाहेले मेरे वृषाण बड़े हो गाये बाद में कखह में और लोडे पैर
बाल उगे और आवाज़ गाहेरा हो गया. मुँह पैर मुच्च निकल आई. लोडा लंबा और मोटा हो गया. रात को स्वप्न-दोष हो
ने लगा. में मूट मारना सिख गया.
सविता और चंपा भाभी को पहली बार देखा तब मेरे मान में छोड़ने का विचार तक आया नहीं था, में बच्चा जो था.
सुमन भाभी की बात कुच्छ ओर थी. एक तो वो मुज़ से चार साल ही बड़ी थी. दूसरे, वो काफ़ी ख़ूबसूरत थी, या कहोकी मुज़े ख़ूबसूरत नज़र आती थी. उस के आने के बाद में हैर रात कल्पना किए जाता था की भैया उसे कैसे छोड़ते होंगेऔर रोज़ उस के नाम मूट मार लेता था. भैया भी रात दिन उस के पिच्छे पड़े रहते थे. सविता भाभी और चंपा भाभीकी कोई क़ीमत रही नहीं थी. में मानता हूँ है की भैया चांगे के वास्ते कभी कभी उन दो नो को भी छोड़ते थे. तजुबईकी बात ये है की अपने में कुच्छ कमी हो सकती है ऐसा मानने को भैया तैयार नहीं थे. लंबे लंड से छोड़े और ढेर सारावीरय पत्नी की छूट में उंदेल दे इतना काफ़ी है मर्द के वास्ते बाप बनाने के लिए ऐसा उन का दरध विस्वास था. उन्होने अपने वीरय की जाँच करवाई नहीं थी.उमर का फ़ासला काम होने से सुमन भाभी के साथ मेरी अचची बनती थी, हालन की वो मुज़े बच्चा ही समाजति थी.
मेरी मौजूदगी में कभी कभी उस का पल्लू खिसक जाता तो वो शरमति नहीं थी. इसी लिए उस के गोरे गोरे स्तन
देखने के कई मौक़े मिले मुज़े. एक बार स्नान के बाद वो कपड़े बदल रही थी और में जा पहुँचा. उस का आधा नंगा
बदन देख में शरमा गया लेकिन वो बिना हिच किचत बोली, 'दरवाज़ा खीत ख़िता के आया करो.'
दो साल यूँ गुज़र गाये में अठारह साल का हो गया था और गाओं की सचूल की 12 वी में पढ़ता था. भैया चौथी शादी
के बारे में सोचने लगे. उन दीनो में जो घटनाएँ घाटी इस का ये बयान है
बात ये हुई की मेरी उम्र की एक नोकारानी, बसंती, हमारे घर काम पे आया करती थी. वैसे मेने उसे बचपन से बड़ी
होते देखा था. बसंती इतनी सुंदर तो नहीं थी लेकिन चौदह साल की डूसरी लड़कियों के बजाय उस के स्तन काफ़ी बड़े
बड़े लुभावने थे. पतले कपड़े की चोली के आर पार उस की छ्छोटी छ्छोटी निपपलेस साफ़ दिखाई देती थी. में अपने
आप को रोक नहीं सका. एक दिन मौक़ा देख मेने उस के स्तन थाम लिया. उस ने ग़ुस्से से मेरा हाथ ज़टक डाला और
बोली, 'आइंदा ऐसी हरकत करोगे तो बड़े सेठ को बता दूँगी' भैया के दर से मेने फिर कभी बसंती का नाम ना लिया.
एक साल पाहेले सत्रह साल की बसंती को ब्याह दिया गया था. एक साल ससुराल में रह कर अब वो दो महीनो वास्ते
यहाँ आई थी. शादी के बाद उस का बदन भर गया था और मुज़े उस को छोड़ने का दिल हो गया था लेकिन कुच्छ कर
नहीं पता था. वो मुज़ से क़तराती रहती थी और में दर का मारा उसे दूर से ही देख लार तपका रहा था.
अचानक क्या हुआ क्या मालूम, लेकिन एक दिन महॉल बदल गया. दो चार बार बसंती मेरे सामने देख मुस्कराई. काम
करते करते मुज़े गौर से देखने लगी मुज़े अचच्ा लगता था और दिल भी हो जाता था उस के बड़े बड़े स्तनों को मसल
डालने को. लेकिन दर भी लगता था. इसी लिए मेने कोई प्रतिभव नहीं दिया. वो नखारें दिखती रही.
एक दिन दोपहर को में अपने स्टूदय रूम में पढ़ रहा था. मेरा स्टूदय रूम अलग मकान में था, में वहीं सोया करता था.
उस वक़्त बसंती चली आई और रोटल सूरत बना कर कहने लगी 'इतने नाराज़ क्यूं हो मुज़ से, मंगल ?'
मेने कहा 'नाराज़ ? में कहाँ नाराज़ हूँ ? में क्यूं हौन नाराज़?'
उस की आँखों में आँसू आ गाये वो बोली, 'मुज़े मालूम है उस दिन मेने तुमरा हाथ जो ज़टक दिया था ना ? लेकिन में
क्या करती ? एक ओर दर लगता था और दूसरे दबाने से दर्द होता था. माफ़ कर दो मंगल मुज़े.'
इतने में उस की ओधनी का पल्लू खिसक गया, पता नहीं की अपने आप खिसका या उस ने जान बुज़ के खिसकया.
नतीजा एक ही हुआ, लोव कूट वाली चोली में से उस के गोरे गोरे स्तनों का उपरी हिस्सा दिखाई दिया. मेरे लोडे ने
बग़ावत की नौबत लगाई.
में, उस में माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है म..मेने नाराज़ नहीं हूँ तो मुज़े मागणी चाहिए.'
मेरी हिच किचाहत देख वो मुस्करा गयी और हास के मुज़ से लिपट गयी और बोली, 'सच्ची ? ओह, मंगल, में इतनी
ख़ुश हूँ अब. मुज़े दर था की तुम मुज़ से रुत गाये हो. लेकिन में टुमए माफ़ नहीं करूंगी जब तक तुम मेरी चुचियों को
फिर नहीं छ्छुओगे.' शर्म से वो नीचा देखने लगी मेने उसे अलग किया तो उस ने मेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ अपने
स्तन पैर रख दिया और दबाए रक्खा.
'छ्छोड़, छ्छोड़ पगली, कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.'
'तो होने दो. मंगल, पसंद आई मेरी च्छुचि ? उस दिन तो ये कच्ची थी, छ्छू ने पैर भी दर्द होता था. आज मसल भी
डालो, मज़ा आता है
मेने हाथ छ्छुड़ा लिया और कहा, 'चली जा, कोई आ जाएगा.'
वो बोली, 'जाती हूँ लेकिन रात को आओुंगी. आओउन ना ?'
उस का रात को आने का ख़याल मात्र से मेरा लोडा टन गया. मेने पूच्छा, 'ज़रूर आओगी?' और हिम्मत जुटा कर स्तन
को छ्ुा. विरोध किए बिना वो बोली,
'ज़रूर आओुंगी. तुम उपर वाले कमरे में सोना. और एक बात बताओ, तुमने किस लड़की को छोड़ा है ?' उस ने मेरा
हाथ पकड़ लिया मगर हटाया नहीं.
'नहीं तो.' कह के मेने स्तन दबाया. ओह, क्या चीज़ था वो स्तन. उस ने पूच्छा, 'मुज़े छोड़ना है ?' सुन ते ही में छोंक
पड़ा.
'उन्न..ह..हाँ
'लेकिन बेकिन कुच्छ नहीं. रात को बात करेंगे.' धीरे से उस ने मेरा हाथ हटाया और मुस्कुराती चली गयी
मुज़े क्या पता की इस के पिच्छे सुमन भाभी का हाथ था ?
रात का इंतेज़ार करते हुए मेरा लंड खड़ा का खड़ा ही रहा, दो बार मूट मरने के बाद भी. क़रीबन दस बजे वो आई.
'सारी रात हमारी है में यहाँ ही सोने वाली हूँ उस ने कहा और मुज़ से लिपट गयी उस के कठोर स्तन मेरे सीने से डब
गाये वो रेशम की चोली, घाघारी और ओधनी पहेने आई थी. उस के बदन से मादक सुवास आ रही थी. मेने ऐसे ही
उस को मेरे बहू पाश में जकड़ लिया
'हाय डैया, इतना ज़ोर से नहीं, मेरी हड्डियान टूट जाएगी.' वो बोली. मेरे हाथ उस की पीठ सहालाने लगे तो उस ने मेरेबालों में उंगलियाँ फिरनी शुरू कर दी. मेरा सर पकड़ कर नीचा किया और मेरे मुँह से अपना मुँह टीका दिया.उस के नाज़ुक होत मेरे होत से छूटे ही मेरे बदन में ज़्रज़ुरी फैल गयी और लोडा खड़ा होने लगा. ये मेरा पहला चुंबनथा, मुज़े पता नहीं था की क्या किया जाता है अपने आप मेरे हाथ उस की पीठ से नीचे उतर कर छूटड़ पैर रेंगने लगे.पतले कपड़े से बनी घाघारी मानो थी ही नहीं. उस के भारी गोल गोल नितंब मेने सहलाए और दबोचे. उस ने नितंबऐसे हिलाया की मेरा लंड उस के पेट साथ डब गया.

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पहला नशा पहला मज़ा 2

कहवत सछ है कि जहन चाह वहन राह। मैने सोचा कि जब वह अपनि दोनो सगि लदकियोन को मज़ा दे सकता है तु
मौका मिलने पर मुझे कयोन नहि। मैन तु उनदोनो से ज़यादा सुनदर हून। जब मैन भि सरिता और निना कि तरह
उनसे मज़ा लेने लगूनगि तु वह मेरि भि किसि से चुदवा दैनगे। मैन येह सब सोचते उनसले के साथ मज़ा लेने का
पलन बनने लगि। इस समय 2 पम हुवा था। मुझे एक रासता सूझा। मैन मुम्मी के पास गयि और बोलि, “मुम्मी
उनसले आये हैन। निना को एनगलिश समझा रहे हैन मैन भि जौन?” भला इस काम के मुम्मी कयोन इनकार
करतिन। हान कहने पर मैन एनगलिश कि नोते-बूक लेकर ऊपर गयि।

“सरिता दिदि !” “आओ।” बदि बहन ने अनदर बुलया। “दिदि निना कहन है?” “पपा के कमरे मैन होगि।”
“उनसले भि हैन?” “हान जओ।”

तभि बगल के कमरे से निना आयि तु उसे देख मेरे बदन मैन बिजलि दौदि। मैने उस्से कहा, “उनसले से एनगलिश
परहनि है।” यह बात कहते हुवे मेरि चूत फरक उथि थि। उनसले ने मेरि बात शयद सुन लि थि। वे रूम से बहर आ
बोले “परहना है आओ आओ।”

मैने सर हिलकर हान किया। वह लुनगि बनियन मैन था। मैन उनकि दोनो लदकियोन से कै गुना अधिक सुनदर थि।
वह अपनि लदकियोन से मज़ा लेता था तु मेरि जैसि लदकि से लिफ़त पाकर फ़ौरन तैययर हो जता। वह खिलदि था
और मैन उसे लिफ़त देने जा रहि थि। “उनसले मेरि एनगलिश वेअक है। आप परहा दिया करेन।” मैने अपनि
चूचियोन को उभारकर कहा। उसकि आनखेन मेरि चूचियोन पर हि जमि थि। मेरि हरकत पर उसके मुनह मैन पानि
आ गया, वह बोला, “ थीक है, हम रहे तु आ जया करो एनगलिश सत्रोनग कर देनगे। आओ अनदर।”

मैन रूम मैन गयि। मेरे साथ निना भि थि। मैन सोच रहि थि कि निना के रहते वह पहलि बार कैसे हाथ लगयेगा।
वैसे मैन तु दोनो बहनोन कि तरह दिल खोलकर नीचे ऊपर दोनो का मज़ा लेने को बेकरर थि। उनसले के साथ दोनो
को जो मज़ा आया था वह मैन देख चुकि थि। मुझे तु बस केवल मज़ा चहिये था जवन या बूरहा कोइ भि हो।

वह मुझे सोफ़ा पर बिथकर निना से बोला, “बेति तुमहरि सहेलि को परहा दे तुम अनदर जओ।” यह तु उसने मेरे
मन्न कि बात कहि थि। निना चलि गयि तु उसकि आनखेन मेरि चूचियोन पर तिक गयि जिस्से मुझे उम्मीद हो गयि।
निना के जने के बाद वह मेरे सामने बैथकर मेरि चूचियोन को घूरते हुवे बोला, “निकलो कया परहोगि?”

उसकि बात पर मैने बूक उसके समे कर राअनो को फैलकर कहा,” उनसले इसका त्रनसलतिओन करवा दिजिये।”
“हान लिखो” और वह फ़ौरन शुरु हो गया। उसने पास आ धिरे से मेरे बदन को छुवा तु बिजलि दौदि। मेरि फ़रोसक
मैन चूचियन तेज़ि से उथने बैथने लगि। तभि लेफ़त हनद बूक देखने के बहने मेरि रान पर रख मुझे पगल कर दिया।
वह मुझे परहते हुवे मेरि रान सहलने लगा। हमको मज़ा आया तु मैन उसे लिफ़त देने के लिये अपनि चूचियोन को
उभार ललचयि मदभरि आनखोन से उसकि ऊर देख बोलि, “ओह्ह उनसले थकन महसूस हो रहि है।” मेरि बात
सुन वह चलक समझ गया और मेरे गाल पर हाथ फ़ैर बोला, “थोदा आरम कर लो।” “पता नहि कयोन उनसले
बदत तूत रहा है।” “कोइ बात नहि बेति सयनि हो गयि हो, ऐसा होता। लैत जओ तु बदन दबा दून।”

मैन तु मज़ा लेने के लिये हि आयि थि। अपनि ऊर से गरीन सिगनल दिखति फ़ौरन अपना हाथ चूत पर ले जा चद्दि
(पनती) खुजलते हुवे उसको देखते हुवे कहा, “उनसले दरवज़ा बनद करके दबैयेगा।” वह मेरे अनदर कि बैचेनि को
समझ गया। उसने एक थपकि मेरि चूचियोन पर दे मुझे मज़े से भरकर कहा, “उनसले से कयोन शरमति हो। बदि हो
गयि हो, दबवकर मज़ा लिया करो।”

चूचियन दबने का इशरा कर तु एकदम बौखला दिया था। उसको फ़सने के लिये ज़यदा कोशिश नमहि करनि पदि।
चूचियोन पर हाथ लगया तु तदप गयि। उसने उथकर दरवज़ा बनद किया और वपस आया तु मैन शरम भूलकर दोनो
चूचियोन पर हाथ रखकर बोलि, “उनसले धीरे से दबैयेगा, दरद होगा।”

यह तु उस लौनदियबज़ के लिये मेरि ऊर से खुला इशरा था। वह मज़े से भर मेरे गालोन को अपने हाथ मैन ले बोला,
“हय कितनि खूबसुरत हो। मज़ा अयेगा दबवने मैन।” इस पर मैन उसके साथ मज़ा लेने को बेकरार हो गयि और
बोलि, “किसि को पता लग गया तु?” “कैसे पता लगेगा।हाथ हतओ देखो मसलवने मैन कितना मज़ा आता है।
अभि तु थीक से खिलि भि नहि हो।” और गाल के हाथ को सरककर फ़रोसक के दोनो उभरोन पर लकर जो दबया तु
मैन अपना सब कुछ भूलकर पीथ को सोफ़ा से तेक्कर चुपचप दबवने लगि। ऐसा लगा जैसे उसकि निना कि चूचियोन
से ज़यदा मज़ा आ रहा हो। दबवते हि मुझे नशा सा हो गया। उसने दोनो को 10-15 बार मसला फ़िर मेरे गाल पर
हाथ फैर मेरे लिपस को अपने लिपस के बीच ले दबा-दबकर चूसने लगा। मैन मसत हो कुनवरि चूत को रानो के बीच
दबा सोफ़ा पर से चुतर उछलने लगि।

हूनथो को चुसवने मैन गज़ब का मज़ा आया। वह खिलदि था। नये माल को दीवना बनना उसे आता था। मैन चुप थि।
हूनथ चुसवने से चूत कि खुजलि तेज़ हुयि। तभि उसने मेरे लिपस अलगकर मेरि दोनो चूचियन पकदि और तनि तनि
घुनदियोन को जो मसला तु मैन औकि लदकियोन कि तरह बेशरम बन्ने को मजबूर हो गयि। मैन अध-खुलि आनखोन
से उसे देखते बोलि, “हये उनसले मज़ा आ रहा है।” “तुमहरि घुनदि छोति है नहि तु और मज़ा आता।मेरि निना
तुमहरि उमर कि है। उसके निप्पले देखा कितने बदे हैन।”

“ऊह उनसले मेरे निप्पले छोते कयोन हैन?” “मज़ा जो नहि लेति हो। किसि को पता नहि चलेगा दिल खोलकर
मज़ा लो।” “उनसले बहुत मज़ा है।” “अभि तु कुछ नहि बात मनोगि तु बहुत आयेगा।” और निप्पले को चुतकि
से मसल मुझे पगल करने लगा।

कुछ देर बाद वह पीछे हुवा और मेरि दोनो गोरि गोरि रानो को हाथोन मैन अलग अलग पकद कर झतके के चिपकि
रानो को खोलकर मुझे आगे खीनचा तु मैन हानपति सि सोफ़ा पर चित्त हो गयि। उसने अपने सीने को मेरि कमर पर
रखा और आगे कि ऊर झुक लेफ़त चूचि को मुनह मैन लेकर रिघत चूचि को हाथ से दबा दबा जो चूसना शुरु किया तु
मैन मसत होकर उसके मुनह पर चूचियन दबति बोलि, “हये उनसले बहुत मज़ा है।” शयद मेरि ताज़ि चूचियन पीने
से उसको भि नया मज़ा मिल रहा था। अब मैन भि सरिता और निना कि तरग ननगि होकर मज़ा लेने के लिये तरप
उथि। चूचियोन को मुनह से पीकर तु उसने मुझे मसत कर दिया था। मैन दूसरि चूचि को उसके मुनह मैन थैलकर
बोलि, “और पीजिये उनसले।”

दूसरि को 8-10 बार हि चूसा फ़िर पीचे हो मेरि केले के खमबे सि चिकनि रानो को चीरकर फ़रोसक को पैत पर रख
मेरि रानो को सहलते जन्नत का दिदार करते बोला, “हयेतुमहरि निना से ज़यादा मज़ा दे रहि है। पैर ऐसे हि फजैलये
रहना।” “जी उनसले।”

फ़िर तु मेरे मज़े को पनख लग गये। उसने अपने मुनह को दोनो सुर-सुरति तनगो के बीच बदा हाथो को ऊपर कर
फ़रोसक के अनदर से मसत होकर जवनि कि बहर मैन दूबि दोनो ननगि चूचियोन को पकदकर दबते हुवे जु अपनि
जीभ को मेरि पनती के ऊपर चला तु मैन फ़ौरन अपने आप चद्दि को हाथो से खिसका उसको अपनि गोरि गोरि मख्खन
सि गुलबि चूत चतने लगि। उसकि जीभ मेरि चूत पर सानप सि चल रहि थि। उस्से ननगि चूत चतवते हुवे चूचियन
मसलवने मैन गज़ब का मज़ा आ रहा था। मेरि राने फ़रोग कि तरह फैलि थि।

अब हमको मनपसनद मज़ा मिल रहा था। वह चूत के तिघत होले मैन तौनग फ़ुसक कर रहा था और मैन ऊह्ह
आआह्हह्हह करति नीचे से चुतर उछल उछल हये उनसले कर रहि थि। वह बीच बीच मैन रुकता, मेरि चिकनि गुलबि
चूत को पयार से देखता और फ़िर जीभ से चतते हुवे मुझे मज़े के सागर मैन दुबोने लगता। मेरि चूत गोरि थि इसलिये
वह बदे पयार से चात रहा था। जो मज़ा देखकर आया था, उस्से कै गुना ज़यादा मज़ा अब आ रहा था। नै चूत चतकर
उसका चेहरा भि दमक उथा था।

अब हमदोनो कि शरम और झिझक खतम हो गयि थि। उनसले के पास सचमुच एनगलिश कि अछि परहयि हो रहि
थि। जब जीभ लाल गो गयि फानक पर चलति तु पूरा बदन झनझना उथता। 15 सला चूइत पर हलके से बाल थे। चूत
चद्दि के बहर थि। वह 10 मिनुते तक कछे आम सि मेरि चूत चतता रहा और अमरूद सि चूचियन दबता रहा और
मैन भि बिना लाज मज़ा लेति रहि। मज़ा कम होने के बजये बरहता हि जा रहा था। मैने जु हाथ से चूत को फैलया तु
वह खुश होकर जीभ को चूत मैन घुसेदने लगा तु मैन कसमसकर बोलि, “हये उनसले खूब मज़ा आ रहा है।” “खूब
मज़ा लो।” और मख्खन सि चूत को तौनग फ़ुसक करने लगा।

अब तु मेरा मन्न सोफ़े से उथने को नहि हो रहा था। बदन के कपदे बोझ लग रहे थे। मैन बेकररि के साथ बोलि,
“उनसले ननगि करके दिदि कि तरह……।।”

यह सुन वह ज़रा चौनका पर मेरे तज़े माल मैन इतना मगन था कि समझ नहि पाया। मैन अपने हाथ से चूत फैलये
थि। अब तु मेरा मन्न भि चुदवने को तरप उथा। तभि उसने चूत से जीभ हतयि और मेरे हूनत चूमकर बोला,
“तुमहरि चूत तु मख्खन है। बदि तसती है।”

“हये उनसले हमको भि…।।” “कया? बोलो बेति शरमओ नहि।” “किसि से हमको भि चुदवा दिजिये।” और
मैन उथकर बैथ गयि।

वह झरने के बजये और ललचा गया। मेरा बदन दहक रहा था और चेहरा खिल गया था। समझ गया कि मैन भि
उसकि लदकियोन कि तरह मज़ा पाकर बहक गयि हून। मुसकान के साथ मेरे फानक को मसलते बोला, “चुदवा देनगे,
पूरा मज़ा दिलवयेनगे पर पहले चुदवने लयक तु हो जओ। मेरि दोनो लदकियन चुदवा सकति हैन।”

“ऊह उनसले जलदि से मुझे भि चुदवने लयक किजिये ना। मैन भि निना के बरबर हून।”

“जलदि हि बदि कर दूनगा। ननगि हो एकदम।”

यह कह वह उथा और बहर जाने लगा तु मैन घबरकर बोलि, “उनसले ननगि तु हो रहि हून।” “कपदे उतरो ज़रा
निना को बुला लये।”

“नहि उनसले हये।”

“निना रहेगि तु तुमको ज़यादा मज़ा आयेगा। तुम उस्से आपस मैन मज़ा लोगि तु जलदि बदि होगि। वह तु तुमहरि
सहेलि है। तुम ननगि हो मैन उसे लेकर आता हून।”

मैन तु पहले हि यह सब दख चुकि थि। मैन आने वले मज़े को सोच बिना झिझक पूरे कपदे उतर ननगि हो गयि।
मसलि गयि चूचियन और चति गयि चूत बहुत खूबसुरत लग रहि थि। अब यकीन था कि निना कि तरह खुलकर मुझे
भि मज़ा देगा। तभि वह निना के साथ वपस आया। निना मुझे ननगि देख मुसकरति हुयि पास आयि और बोलि,
“हये इतना शरमा कयोन रहि हो? मेरे पपा बहुत अचे हैन। हमलोगो को खूब मज़ा देते हैन। अब हम तुम आपस मैन
करेनगे तु खूब मज़ा आयेगा।”

जब निना ने मेरि पीथ पर हाथ फ़ैर कर कहा तु मेरा मन्न उमनग से भर गया। तभि उसका बाप मेरि कमर मैन हाथ
दालकर मेरि चूचि को चत्ते हुवे बोला, “हये निना देखो इसकि कितनि गोरि गोरि हैन।”

इसपर निना मेरे आगे बैथकर मेरि चूत को चूमकर बोलि, “हान पपा चूत भि अछि है।” “चातो बेति अपनि सहेलि
कि, अब जो आयेगा उसको तुमदोनो कि कलि और इसकि गोरि चोदने मैन खूब मज़ा आयेगा।”

फ़िर वह मेरि चूचियन चूसते हुवे अपनि लदकि को मेरि चूत चतने लगा। मैन मसत थि। कुछ देर बाद वह मेरे पीछे
आया अया और अपने मरियल लुनद को मेरि गानद से लगा दोनो चूचियोन को मसलने लगा। मैन इस मज़े को पा
जवन हो गयि थि। तभि निना बोलि, “ओह्ह पपा बहुत तसते है इसकि चूत मैन ओह्ह पपा आप भि चातो ना।”
उसकि बात सुन उनसले भि नीचे बैथे और मेरि चूत मैन जीभ दला तु निना मेरे पीछे जा मेरि गानद का छेद चतने
लगि। मैन हवा मैन उद रहि थि। कुछ देर बाद वह अपनि उनगलि से मेरि चूत चोदने लगा तु मुझे नया मज़ा मिला।

उसने 60-70 बार फ़िनगेर फ़ुसक किया था कि मैन अपनि जवनि का पहला कुनवरा पनि बहने लगि जेसि दोनो
बाप-बेति फ़ौरन जीभ से चतने लगे। दोनो ने एक एक बूनद पी लिया। वै दोनो अभि मेरा रस चत हि रहे थे कि बदि
वलि सरिता भि रूम मैन आ गयि। उसके आने से ज़रा भि शरम नहि आयि। अब दोनो ने मुझे छोदा तु सरिता पास
आ मेरि चूचियन पकद कर बोलि, “मज़ा आया?”

“हान दिदि।”

“अगर रात मैन पपा कोइ लदका लये तु तुम भि ऊपर आ जना तु तुमहरि भि तैल लगवकर चुदवा देनगे।”

मैन इसके बाद कपदे पहनकर नीचे आ गयि।

आप इस सतोरी के अगले परत के लिये इस एमैल से सोनतसत कर सकते हैन। अयेश_ज़बीन@होतमैल।सोम


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